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mahabharat 2.24.d4-d5h: तब भगवान कृष्ण ने जरासंध को मारने की इच्छा से भीमसेन की ओर देखते हुए एक सरकंडा* हाथ में लिया और उसे (दंतखुरची की तरह) दो टुकड़ों में फाड़कर फेंक दिया। यह जरासंध को मारने का संकेत था।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक d4-d5h
 
 
श्लोक  2.24.d4-d5h 
(ततस्तु भगवान् कृष्णो जरासंधजिघांसया।
भीमसेनं समालोक्य नलं जग्राह पाणिना॥
द्विधा चिच्छेद वै तत् तु जरासंधवधं प्रति।)
 
 
अनुवाद
तब भगवान कृष्ण ने जरासंध को मारने की इच्छा से भीमसेन की ओर देखते हुए एक सरकंडा* हाथ में लिया और उसे (दंतखुरची की तरह) दो टुकड़ों में फाड़कर फेंक दिया। यह जरासंध को मारने का संकेत था।
 
Then Lord Krishna, looking at Bhimasena with the desire to kill Jarasandha, took a reed* in his hand and tore it (like a toothpick) into two pieces (and threw it away). This was a signal to kill Jarasandha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)