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mahabharat 2.24.d25: अब मैं चिंता मुक्त हो जाऊँगा और सभी यज्ञों में श्रेष्ठ राजसूय यज्ञ का शुभ अवसर प्राप्त करूँगा। हे प्रभु! आपकी बुद्धि और शक्ति के सहयोग से मैं इस यज्ञ को करने के योग्य हो गया हूँ।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  2.24.d25 
राजसूयं क्रतुश्रेष्ठं प्राप्स्यामि विगतज्वर:।
त्वद्‍बुद्धिबलमाश्रित्य यागार्होऽस्मि जनार्दन॥
 
 
अनुवाद
अब मैं चिंता मुक्त हो जाऊँगा और सभी यज्ञों में श्रेष्ठ राजसूय यज्ञ का शुभ अवसर प्राप्त करूँगा। हे प्रभु! आपकी बुद्धि और शक्ति के सहयोग से मैं इस यज्ञ को करने के योग्य हो गया हूँ।
 
Now I will be free of worries and will get the auspicious opportunity of Rajasuya, the best of all sacrifices. Lord! With the support of your wisdom and power, I have become eligible to perform the sacrifice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)