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mahabharat 2.24.d19-d20: दाह संस्कार के बाद, सहदेव ने अपने छोटे भाई के साथ अपने पिता को जल अर्पित किया। इस प्रकार, अपने पिता का आध्यात्मिक कार्य संपन्न करके, राजकुमार सहदेव नगर छोड़कर उस स्थान पर गए जहाँ भगवान कृष्ण और पांडु पुत्र भीमसेन और अर्जुन उपस्थित थे। उन्होंने हाथ जोड़कर भगवान कृष्ण से विनम्रतापूर्वक कहा, "हे भगवान!   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक d19-d20
 
 
श्लोक  2.24.d19-d20 
उदकं तस्य चक्रेऽथ सहदेव: सहानुज:॥
कृत्वा पितु: स्वर्गगतिं निर्ययौ यत्र केशव:।
पाण्डवौ च महाभागौ भीमसेनार्जुनावुभौ॥
स प्रह्व: प्राञ्जलिर्भूत्वा विज्ञापयत माधवम्।
 
 
अनुवाद
दाह संस्कार के बाद, सहदेव ने अपने छोटे भाई के साथ अपने पिता को जल अर्पित किया। इस प्रकार, अपने पिता का आध्यात्मिक कार्य संपन्न करके, राजकुमार सहदेव नगर छोड़कर उस स्थान पर गए जहाँ भगवान कृष्ण और पांडु पुत्र भीमसेन और अर्जुन उपस्थित थे। उन्होंने हाथ जोड़कर भगवान कृष्ण से विनम्रतापूर्वक कहा, "हे भगवान!
 
After cremation, Sahadev along with his younger brother offered water to his father. Thus, after performing the spiritual work of his father, prince Sahadev left the city and went to the place where Lord Krishna and the great sons of Pandu, Bhimsena and Arjuna were present. He humbly said to Lord Krishna with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)