Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.24.d16-d18: वे सब एक स्वर में बोले- 'राजन! आप अपने पिता का अन्तिम संस्कार कीजिए।' भगवान श्रीकृष्ण और दोनों कुन्तीकुमारों का यह आदेश सुनकर मगधराज अपने मंत्रियों के साथ शीघ्रतापूर्वक नगर में प्रविष्ट हुए। फिर चन्दन और केसर, देवदारु और काली अगरु आदि सुगन्धित काष्ठों से एक चिता बनाकर उस पर मगधराज का शव रखा गया। तत्पश्चात, जब चिता जल रही थी, तब मगधराज के शरीर पर चन्दन और घी आदि नाना प्रकार के सुगन्धित तेलों की धाराएँ गिराई गईं। चारों ओर से अक्षत और पुष्पों की वर्षा की गई। | mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे सब एक स्वर में बोले- 'राजन! आप अपने पिता का अन्तिम संस्कार कीजिए।' भगवान श्रीकृष्ण और दोनों कुन्तीकुमारों का यह आदेश सुनकर मगधराज अपने मंत्रियों के साथ शीघ्रतापूर्वक नगर में प्रविष्ट हुए। फिर चन्दन और केसर, देवदारु और काली अगरु आदि सुगन्धित काष्ठों से एक चिता बनाकर उस पर मगधराज का शव रखा गया। तत्पश्चात, जब चिता जल रही थी, तब मगधराज के शरीर पर चन्दन और घी आदि नाना प्रकार के सुगन्धित तेलों की धाराएँ गिराई गईं। चारों ओर से अक्षत और पुष्पों की वर्षा की गई।
They all said in one voice - 'King! You perform the last rites of your father.' Hearing this order of Lord Krishna and the two Kuntikumars, the Magadha prince quickly entered the city with his ministers. Then a pyre was made from sandalwood and fragrant woods like saffron, cedarwood and black aguru etc. and the body of the king of Magadha was placed on it. Thereafter, while the burning pyre was burning, streams of various types of fragrant oils like sandalwood and ghee were dropped on the body of the king of Magadha. Akshat and flowers were showered from everywhere.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥