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mahabharat 2.24.d15: वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! सहदेव के इस अनुरोध पर देवकीनन्दन भगवान श्रीकृष्ण तथा महारथी भीमसेन तथा अर्जुन बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  2.24.d15 
वैशम्पायन उवाच
एवं विज्ञाप्यमानस्य सहदेवस्य मारिष।
प्रहृष्टो देवकीपुत्र: पाण्डवौ च महारथौ॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! सहदेव के इस अनुरोध पर देवकीनन्दन भगवान श्रीकृष्ण तथा महारथी भीमसेन तथा अर्जुन बहुत प्रसन्न हुए।
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! On this request of Sahadev, Devkinandan Lord Shri Krishna and Maharathi Bhimsen and Arjun were very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)