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mahabharat 2.24.d14: मैं आपसे, भीमसेन और अर्जुन से अनुमति लेकर यह कार्य करूंगा और आपकी कृपा से अपनी इच्छानुसार निर्भयतापूर्वक और सुखपूर्वक विचरण करूंगा।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  2.24.d14 
त्वत्तोऽभ्यनुज्ञां सम्प्राप्य भीमसेनात् तथार्जुनात्।
निर्भयो विचरिष्यामि यथाकामं यथासुखम्॥
 
 
अनुवाद
मैं आपसे, भीमसेन और अर्जुन से अनुमति लेकर यह कार्य करूंगा और आपकी कृपा से अपनी इच्छानुसार निर्भयतापूर्वक और सुखपूर्वक विचरण करूंगा।
 
I will do this task after taking permission from you, Bhimasena and Arjuna and with your grace, I will move fearlessly and comfortably as per my wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)