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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  2.24.d13 
त्वां प्रपन्नोऽस्मि गोविन्द प्रसादं कुरु मे प्रभो।
पितुरिच्छामि संस्कारं कर्तुं देवकिनन्दन॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! मैं आपकी शरण में आया हूँ। प्रभु! मुझ पर दया कीजिए। देवकीनन्दन! मैं अपने पिता का अंतिम संस्कार करना चाहता हूँ।
 
Govind! I have come to your refuge. Prabhu! Please have mercy on me. Devakinandan! I want to perform the last rites of my father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)