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mahabharat 2.24.d12: सहदेव बोले- मानसिंह जनार्दन! महाबाहु पुरुषोत्तम! कृपया मेरे पिता द्वारा किये गये अपराध को अपने हृदय से दूर कर दीजिये।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक d12
 
 
श्लोक  2.24.d12 
(सहदेव उवाच
यत् कृतं पुरुषव्याघ्र मम पित्रा जनार्दन।
तत् ते हृदि महाबाहो न कार्यं पुरुषोत्तम॥
 
 
अनुवाद
सहदेव बोले- मानसिंह जनार्दन! महाबाहु पुरुषोत्तम! कृपया मेरे पिता द्वारा किये गये अपराध को अपने हृदय से दूर कर दीजिये।
 
Sahadev said- Mansingh Janardan! Mahabahu Purushottam! Please remove from your heart the crime committed by my father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)