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mahabharat 2.24.7: तत्पश्चात्, एक हाथ से उसका एक पैर पकड़कर तथा दूसरे पैर पर अपना पैर रखकर, महाबली भीम ने उसके दो टुकड़े कर दिए।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.24.7 
करे गृहीत्वा चरणं द्वेधा चक्रे महाबल:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, एक हाथ से उसका एक पैर पकड़कर तथा दूसरे पैर पर अपना पैर रखकर, महाबली भीम ने उसके दो टुकड़े कर दिए।
 
Thereafter, holding one of his legs with one hand and placing his foot on the other leg, the mighty Bhima tore him into two pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)