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उस समय राजा युधिष्ठिर धर्म, अर्थ और काम की सिद्धि के लिए धर्मपूर्वक धर्म का पालन करते हुए अपनी प्रजा की रक्षा करते हुए उन्हें धर्म का उपदेश भी देते रहे।
At that time, King Yudhishthira followed the right duty for achieving Dharma, Artha and Kama in a righteous manner. Along with protecting his subjects, he also kept preaching Dharma to them. 60.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि जरासंधवधपर्वणि जरासंधवधे चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत जरासंधवधपर्वमें जरासंधवधविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २६ श्लोक मिलाकर कुल ८६ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥