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mahabharat 2.24.6: हे महाबली जनमेजय! भीम ने संकेत समझकर उसे सौ बार घुमाकर भूमि पर पटक दिया और उसकी पीठ को धनुष के समान मोड़कर अपने दोनों घुटनों के प्रहार से उसकी रीढ़ तोड़ दी। फिर भीम ने उसे अपने शरीर के घर्षण से कुचलते हुए बड़े जोर से गर्जना की।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.24.6 
भ्रामयित्वा शतगुणं जानुभ्यां भरतर्षभ।
बभञ्ज पृष्ठं संक्षिप्य निष्पिष्य विननाद च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली जनमेजय! भीम ने संकेत समझकर उसे सौ बार घुमाकर भूमि पर पटक दिया और उसकी पीठ को धनुष के समान मोड़कर अपने दोनों घुटनों के प्रहार से उसकी रीढ़ तोड़ दी। फिर भीम ने उसे अपने शरीर के घर्षण से कुचलते हुए बड़े जोर से गर्जना की।
 
O great Janamejaya, (Bhima understood the signal and) whirled him around a hundred times and threw him on the ground and bending his back like a bow broke his spine with the blows of both his knees. Then, while grinding him with the friction of his body, Bhima roared very loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)