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mahabharat 2.24.57: हे भरतश्रेष्ठ! जाते समय युधिष्ठिर आदि सभी पाण्डवों ने सहज ही सब कार्य करने वाले भगवान श्रीकृष्ण की परिक्रमा की॥57॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  2.24.57 
ततो युधिष्ठिरमुखा: पाण्डवा भरतर्षभ।
प्रदक्षिणमकुर्वन्त कृष्णमक्लिष्टकारिणम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जाते समय युधिष्ठिर आदि सभी पाण्डवों ने सहज ही सब कार्य करने वाले भगवान श्रीकृष्ण की परिक्रमा की॥57॥
 
Bharatshrestha! While leaving, all the Pandavas like Yudhishthir and others spontaneously circumambulated Lord Krishna who did all the work. 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)