Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.24.54-56: भरत! शत्रुओं का नाश करने वाले श्रीकृष्ण बुद्धि से जरासंध का वध करके धर्मराज युधिष्ठिर, कुन्ती और द्रौपदी से अनुमति लेकर, सुभद्रा, भीमसेन, अर्जुन, नकुल, सहदेव और धौम्यजी से भी पूछकर, धर्मराज द्वारा दिये हुए उसी दिव्य और उत्तम रथ पर, जो मन के समान वेगवान था, समस्त दिशाओं में विचरण करते हुए अपनी द्वारका नगरी को चले गये। | mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
घातयित्वा जरासंधं बुद्धिपूर्वमरिंदम:।
धर्मराजमनुज्ञाप्य पृथां कृष्णां च भारत॥ ५४॥
सुभद्रां भीमसेनं च फाल्गुनं यमजौ तथा।
धौम्यमामन्त्रयित्वा च प्रययौ स्वां पुरीं प्रति॥ ५५॥
तेनैव रथमुख्येन मनसस्तुल्यगामिना।
धर्मराजविसृष्टेन दिव्येनानादयन् दिश:॥ ५६॥
अनुवाद
भरत! शत्रुओं का नाश करने वाले श्रीकृष्ण बुद्धि से जरासंध का वध करके धर्मराज युधिष्ठिर, कुन्ती और द्रौपदी से अनुमति लेकर, सुभद्रा, भीमसेन, अर्जुन, नकुल, सहदेव और धौम्यजी से भी पूछकर, धर्मराज द्वारा दिये हुए उसी दिव्य और उत्तम रथ पर, जो मन के समान वेगवान था, समस्त दिशाओं में विचरण करते हुए अपनी द्वारका नगरी को चले गये।
Bharata! After killing Jarasandha with wisdom, the destroyer of enemies, Sri Krishna, after taking permission from Dharmaraja Yudhishthira, Kunti and Draupadi, asking Subhadra, Bhimasena, Arjuna, Nakul, Sahadeva and Dhoumyaji also, went to his Dwarka city, roaming in all directions in the same divine and excellent chariot given by Dharmaraj, which was as fast as the mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥