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mahabharat 2.24.53: जनमेजय! इस प्रकार परम बुद्धिमान जनार्दन ने उस समय पाण्डवों द्वारा अपने शत्रु जरासन्ध को मरवा डाला ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.24.53 
एवं पुरुषशार्दूलो महाबुद्धिर्जनार्दन:।
पाण्डवैर्घातयामास जरासंधमरिं तदा॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! इस प्रकार परम बुद्धिमान जनार्दन ने उस समय पाण्डवों द्वारा अपने शत्रु जरासन्ध को मरवा डाला ॥53॥
 
Janamejaya! In this way, the very intelligent man Janardan got his enemy Jarasandha killed by the Pandavas at that time. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)