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mahabharat 2.24.49: तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण का आदर-सत्कार कर भीमसेन और अर्जुन को भी प्रसन्नतापूर्वक गले लगा लिया। 49॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.24.49 
ततो युधिष्ठिर: कृष्णं पूजयित्वा यथार्हत:।
भीमसेनार्जुनौ चैव प्रहृष्ट: परिषस्वजे॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण का आदर-सत्कार कर भीमसेन और अर्जुन को भी प्रसन्नतापूर्वक गले लगा लिया। 49॥
 
Then Yudhishthir, after honoring Shri Krishna, happily hugged Bhimsen and Arjun also. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)