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mahabharat 2.24.48: 'भरत! सौभाग्य से भीमसेन और अर्जुन दोनों भाई सकुशल अपने नगर में लौट आये और उन्हें कोई हानि नहीं हुई॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.24.48 
दिष्टॺा कुशलिनौ चेमौ भीमसेनधनंजयौ।
पुन: स्वनगरं प्राप्तावक्षताविति भारत॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
'भरत! सौभाग्य से भीमसेन और अर्जुन दोनों भाई सकुशल अपने नगर में लौट आये और उन्हें कोई हानि नहीं हुई॥ 48॥
 
'Bharata! By good fortune both brothers Bhimasena and Arjuna returned safely to their city and did not suffer any harm.'॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)