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mahabharat 2.24.43: तत्पश्चात् जरासन्धकुमार प्रसन्नतापूर्वक अपने पिता के राज्य में अभिषिक्त हुआ। श्रीकृष्ण ने सहदेव को अपना घनिष्ठ मित्र बना लिया, अतः भीमसेन और अर्जुन ने भी उसका बहुत आदर-सत्कार किया। 43॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.24.43 
अभ्यषिञ्चत तत्रैव जरासंधात्मजं मुदा।
गत्वैकत्वं च कृष्णेन पार्थाभ्यां चैव सत्कृत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जरासन्धकुमार प्रसन्नतापूर्वक अपने पिता के राज्य में अभिषिक्त हुआ। श्रीकृष्ण ने सहदेव को अपना घनिष्ठ मित्र बना लिया, अतः भीमसेन और अर्जुन ने भी उसका बहुत आदर-सत्कार किया। 43॥
 
After that, Jarasandhkumar was happily anointed to his father's kingdom. Shri Krishna made Sahadev his close friend, hence Bhimsen and Arjun also honored him greatly. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)