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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.24.42 
भयार्ताय ततस्तस्मै कृष्णो दत्त्वाभयं तदा।
आददेऽस्य महार्हाणि रत्नानि पुरुषोत्तम:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वह भय से पीड़ित था; भगवान श्रीकृष्ण ने उसे सुरक्षा प्रदान की और उसके द्वारा लाए गए बहुमूल्य रत्नों का दान स्वीकार किया।
 
He was suffering from fear; the Supreme Personality of Godhead, Sri Krishna, granted him protection and accepted the gift of precious gems brought by him. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)