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mahabharat 2.24.39: इतना ही नहीं, उन भूपालों ने भगवान दशरथ कुलभूषण को रत्न प्रदान किए। भगवान गोविन्द ने उन सब पर कृपा करने के लिए बड़ी कठिनाई से उस उपहार को स्वीकार किया॥39॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.24.39 
रत्नभाजं च दाशार्हं चक्रुस्ते पृथिवीश्वरा:।
कृच्छ्राज्जग्राह गोविन्दस्तेषां तदनुकम्पया॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, उन भूपालों ने भगवान दशरथ कुलभूषण को रत्न प्रदान किए। भगवान गोविन्द ने उन सब पर कृपा करने के लिए बड़ी कठिनाई से उस उपहार को स्वीकार किया॥39॥
 
Not only this, those Bhupals presented gems to Lord Dasharha Kulabhushan. Lord Govinda accepted the gift with great difficulty just to show his kindness to all of them. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)