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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.24.38 
तत: सुप्रीतमनसस्ते नृपा नृपसत्तम।
तथेत्येवाब्रुवन् सर्वे प्रतिगृह्यास्य तां गिरम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
नृपश्रेष्ठ जनमेजय! तब वे सब राजा प्रसन्न हुए और ‘तथास्तु’ कहकर भगवान् की आज्ञा स्वीकार की॥38॥
 
Nripashrestha Janmejaya! Then all those kings became happy and accepted the order of God by saying 'Amen'. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)