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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.24.37 
तस्य धर्मप्रवृत्तस्य पार्थिवत्वं चिकीर्षत:।
सर्वैर्भवद्भिर्विज्ञाय साहाय्यं क्रियतामिति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
धर्मपरायण होकर इसने सम्राट पद प्राप्त करने की इच्छा की है। आप सब लोग इस कार्य में इसकी सहायता करें॥37॥
 
'Being devoted to Dharma, he has desired to attain the position of an emperor. All of you please help him in this task.'॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)