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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.24.36 
तानुवाच हृषीकेश: समाश्वास्य महामना:।
युधिष्ठिरो राजसूयं क्रतुमाहर्तुमिच्छति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तब महाहृदयी भगवान हृषिकेश ने सबको आश्वस्त करते हुए कहा, 'राजन्! धर्मराज युधिष्ठिर राजसूय यज्ञ करना चाहते हैं।
 
Then the great-hearted Lord Hrishikesh assured them all and said, 'O Kings! Dharmaraja Yudhishthira wishes to perform the Rajasuya Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)