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mahabharat 2.24.35: पुरुषसिंह! हम आपके चरणों में हैं। कृपया आज्ञा दीजिए, हम क्या सेवा करें? यदि कोई कठिन कार्य भी हो, तो आप उसे ऐसा समझें, मानो हम सब राजाओं ने मिलकर उसे पूरा कर लिया हो॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.24.35 
किं कुर्म: पुरुषव्याघ्र शाधि न: प्रणतिस्थितान्।
कृतमित्येव तद् विद्धि नृपैर्यद्यपि दुष्करम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! हम आपके चरणों में हैं। कृपया आज्ञा दीजिए, हम क्या सेवा करें? यदि कोई कठिन कार्य भी हो, तो आप उसे ऐसा समझें, मानो हम सब राजाओं ने मिलकर उसे पूरा कर लिया हो॥ 35॥
 
‘Purushasingh! We are at your feet. Please command us, what service should we perform? Even if there is a difficult task, you should consider it as if all of us kings together have accomplished it.’॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)