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mahabharat 2.24.3: उनके ऐसा कहने पर पुरूषोत्तम श्रीकृष्ण ने भीमसेन को जरासन्ध को मारने के लिये उकसाया और कहा-3॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.24.3 
एवमुक्तस्तत: कृष्ण: प्रत्युवाच वृकोदरम्।
त्वरयन् पुरुषव्याघ्रो जरासंधवधेप्सया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर पुरूषोत्तम श्रीकृष्ण ने भीमसेन को जरासन्ध को मारने के लिये उकसाया और कहा-3॥
 
When he said this, Purushottam Shri Krishna instigated Bhimsen to kill Jarasandha and said - 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)