Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.24.25-26: अब वह उत्तम ध्वज अपनी चमक से ऐसे चमकने लगा जैसे सहस्रों किरणों से आच्छादित मध्याह्न का सूर्य चमक रहा हो। प्राणियों के लिए उसे देखना कठिन हो गया। वह कहीं वृक्षों में नहीं फँसता था, न ही शस्त्रों से कटता था। हे राजन! वह दिव्य और उत्तम ध्वज केवल इस लोक के लोगों को ही दिखाई देता था। 25-26। | mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्निरीक्ष्यो हि भूतानां तेजसाभ्यधिकं बभौ।
आदित्य इव मध्याह्ने सहस्रकिरणावृत:॥ २५॥
न स सज्जति वृक्षेषु शस्त्रैश्चापि न रिष्यते।
दिव्यो ध्वजवरो राजन् दृश्यते चेह मानुषै:॥ २६॥
अनुवाद
अब वह उत्तम ध्वज अपनी चमक से ऐसे चमकने लगा जैसे सहस्रों किरणों से आच्छादित मध्याह्न का सूर्य चमक रहा हो। प्राणियों के लिए उसे देखना कठिन हो गया। वह कहीं वृक्षों में नहीं फँसता था, न ही शस्त्रों से कटता था। हे राजन! वह दिव्य और उत्तम ध्वज केवल इस लोक के लोगों को ही दिखाई देता था। 25-26।
Now that excellent flag started shining with its brightness like the midday sun covered with thousands of rays. It became difficult for the living beings to look at it. It did not get stuck in the trees anywhere, it did not get cut by weapons. O King! That divine and excellent flag was only visible to the people of this world. 25-26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥