Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.24.22: उस उत्तम रथ पर देवताओं द्वारा निर्मित एक ध्वजा लहरा रही थी, जो रथ से अछूती थी (वह रथ से जुड़ी हुई नहीं थी, बिना किसी सहारे के रथ के ऊपर लहरा रही थी)। वह ध्वजा, बहुरंगी, सुन्दर, इन्द्रधनुष के समान चमकती हुई, एक योजन दूर से ही दिखाई दे रही थी। | mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस उत्तम रथ पर देवताओं द्वारा निर्मित एक ध्वजा लहरा रही थी, जो रथ से अछूती थी (वह रथ से जुड़ी हुई नहीं थी, बिना किसी सहारे के रथ के ऊपर लहरा रही थी)। वह ध्वजा, बहुरंगी, सुन्दर, इन्द्रधनुष के समान चमकती हुई, एक योजन दूर से ही दिखाई दे रही थी।
On that excellent chariot fluttered a flag made by the gods, which was untouched by the chariot (it was not attached to the chariot, it fluttered above it without any support). That flag, multicoloured and beautiful, shining like a rainbow, was visible from a distance of one yojana.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥