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mahabharat 2.24.19: यह वही रथ था जिससे इन्द्र ने निन्यानवे राक्षसों का वध किया था। उस रथ को पाकर वे तीनों श्रेष्ठ पुरुष अत्यंत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.24.19 
येन शक्रो दानवानां जघान नवतीर्नव।
तं प्राप्य समहृष्यन्त रथं ते पुरुषर्षभा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह वही रथ था जिससे इन्द्र ने निन्यानवे राक्षसों का वध किया था। उस रथ को पाकर वे तीनों श्रेष्ठ पुरुष अत्यंत प्रसन्न हुए।
 
This was the same chariot with which Indra had killed ninety-nine demons. On getting that chariot, those three best of men were very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)