Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.24.15: उस रथ का नाम सोदर्यावन था। उसमें दो महारथी एक साथ बैठकर युद्ध कर सकते थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण उसके सारथी थे। उस रथ में शत्रुओं पर बार-बार आक्रमण करने की क्षमता थी। वह रथ तेजस्वी होने के साथ-साथ समस्त राजाओं के लिए अजेय भी था॥ 15॥ | mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य: स सोदर्यवान् नाम द्वियोधी कृष्णसारथि:।
अभ्यासघाती संदृश्यो दुर्जय: सर्वराजभि:॥ १५॥
अनुवाद
उस रथ का नाम सोदर्यावन था। उसमें दो महारथी एक साथ बैठकर युद्ध कर सकते थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण उसके सारथी थे। उस रथ में शत्रुओं पर बार-बार आक्रमण करने की क्षमता थी। वह रथ तेजस्वी होने के साथ-साथ समस्त राजाओं के लिए अजेय भी था॥ 15॥
The name of that chariot was Sodaryaavan. Two great warriors could sit together in it and fight. Lord Krishna was its charioteer at that time. That chariot had the facility to attack the enemies repeatedly. Apart from being spectacular, it was also invincible for all kings.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥