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mahabharat 2.24.13: उस महान भय से मुक्त होकर रत्नप्रेमी राजाओं ने भगवान श्रीकृष्ण से भेंट की और उन्हें नाना प्रकार के रत्नों से अलंकृत किया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.24.13 
ते वै रत्नभुजं कृष्णं रत्नार्हा: पृथिवीश्वरा:।
राजानश्चक्रुरासाद्य मोक्षिता महतो भयात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस महान भय से मुक्त होकर रत्नप्रेमी राजाओं ने भगवान श्रीकृष्ण से भेंट की और उन्हें नाना प्रकार के रत्नों से अलंकृत किया॥13॥
 
Freed from that great fear, the jewel-loving kings met Lord Krishna and adorned him with various gems. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)