Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.24.11: तत्पश्चात् वे तीनों शत्रुदमनकारी वीर रात्रि में ही राजा जरासन्ध के निर्जीव शरीर को राजद्वार पर इस प्रकार छोड़कर चले गए मानो वह सो रहा हो ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.24.11 
ततो राज्ञ: कुलद्वारि प्रसुप्तमिव तं नृपम्।
रात्रौ गतासुमुत्सृज्य निश्चक्रमुररिंदमा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे तीनों शत्रुदमनकारी वीर रात्रि में ही राजा जरासन्ध के निर्जीव शरीर को राजद्वार पर इस प्रकार छोड़कर चले गए मानो वह सो रहा हो ॥11॥
 
Thereafter, those three valiant suppressors of enemies left the place in the night, leaving the lifeless body of King Jarasandha at the royal gate as if he was sleeping. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)