Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.24.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् भीमसेन ने अपनी विशाल बुद्धि के बल से जरासन्ध को मारने की इच्छा से यदुनन्दन श्रीकृष्ण को सम्बोधित करके कहा - ॥1॥ | mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् भीमसेन ने अपनी विशाल बुद्धि के बल से जरासन्ध को मारने की इच्छा से यदुनन्दन श्रीकृष्ण को सम्बोधित करके कहा - ॥1॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, Bhimsen, with the help of his vast intellect, addressed Yadunandan Shri Krishna with the desire to kill Jarasandha and said – ॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥