श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 23: जरासंधका भीमसेनके साथ युद्ध करनेका निश्चय, भीम और जरासंधका भयानक युद्ध तथा जरासंधकी थकावट  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.23.32 
क्लान्त: शत्रुर्न कौन्तेय लभ्य: पीडयितुं रणे।
पीडॺमानो हि कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन जह्याज्जीवितमात्मन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! यदि शत्रु थका हुआ हो, तो युद्ध में उसे अधिक कष्ट देना उचित नहीं है। यदि उसे पूर्ण कष्ट दिया जाए, तो वह प्राण त्याग देगा।' 32.
 
'Kuntinandan! If the enemy is tired, it is not right to give him too much pain in the war. If he is given complete pain, he will give up his life. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)