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mahabharat 2.23.30: उन महात्माओं का वह युद्ध त्रयोदशीतक रूप में चलता रहा। चतुर्दशी की रात्रि में मगधनरेश जरासंध क्लेशों से थककर युद्ध से निवृत्त होता हुआ प्रतीत हुआ। 30॥   |   mahabharat अध्याय 2.23: जरासंधका भीमसेनके साथ युद्ध करनेका निश्चय, भीम और जरासंधका भयानक युद्ध तथा जरासंधकी थकावट   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 23: जरासंधका भीमसेनके साथ युद्ध करनेका निश्चय, भीम और जरासंधका भयानक युद्ध तथा जरासंधकी थकावट  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.23.30 
तद् वृत्तं तु त्रयोदश्यां समवेतं महात्मनो:।
चतुर्दश्यां निशायां तु निवृत्तो मागध: क्लमात्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उन महात्माओं का वह युद्ध त्रयोदशीतक रूप में चलता रहा। चतुर्दशी की रात्रि में मगधनरेश जरासंध क्लेशों से थककर युद्ध से निवृत्त होता हुआ प्रतीत हुआ। 30॥
 
That war of those Mahatmas continued in this form as Trayodshitak. On the night of Chaturdashi, Magadhanresh Jarasandha, tired of the troubles, seemed to retire from the war. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)