Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.23.20: इसके बाद, उन्होंने अपनी इच्छानुसार युद्धकला का प्रयोग करना शुरू कर दिया, जैसे 'तृणपीड़' (हाथों और पैरों को इस प्रकार मोड़ना जैसे तिनकों को रस्सी बनाने के लिए मोड़ा जाता है) और मुक्के से पूर्णयोग (शरीर के एक भाग से बक्से पर प्रहार करने का नाटक करना और फिर दूसरे भाग से प्रहार करना) आदि। | mahabharat अध्याय 2.23: जरासंधका भीमसेनके साथ युद्ध करनेका निश्चय, भीम और जरासंधका भयानक युद्ध तथा जरासंधकी थकावट । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके बाद, उन्होंने अपनी इच्छानुसार युद्धकला का प्रयोग करना शुरू कर दिया, जैसे 'तृणपीड़' (हाथों और पैरों को इस प्रकार मोड़ना जैसे तिनकों को रस्सी बनाने के लिए मोड़ा जाता है) और मुक्के से पूर्णयोग (शरीर के एक भाग से बक्से पर प्रहार करने का नाटक करना और फिर दूसरे भाग से प्रहार करना) आदि।
Thereafter, they began to use warfare techniques such as 'Trinapeeda' (twisting the arms and legs like straws are twisted to make ropes) and Poornayoga with fist-fight (pretending to hit a box with one body part and then hitting with the other body part) etc. according to their wishes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥