श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  2.22.d5 
जरासंधस्य दुहिता तस्य भार्यातिविश्रुता।
राज्यशुल्केन दत्ता सा जरासंधेन धीमता॥
 
 
अनुवाद
जरासंध की पुत्री उसकी यशस्वी पत्नी थी, जिसे बुद्धिमान जरासंध ने इस शर्त पर उसे दिया था कि उसके पति को तुरंत राजा अभिषिक्त किया जाएगा।
 
Jarasandha's daughter was his illustrious wife, whom the wise Jarasandha had given to him on the condition that her husband should be immediately anointed king.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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