श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  2.22.d4 
उग्रसेनस्य कंसस्तु बभूव बलवान् सुत:।
ज्येष्ठो बहूनां कौरव्य सर्वशस्त्रविशारद:॥
 
 
अनुवाद
उग्रसेन का पुत्र महाबली कंस था, जो उसके अनेक पुत्रों में सबसे बड़ा था। हे कुरुपुत्र! कंस सभी अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण था।
 
Ugrasen's son was the powerful Kansa, who was the eldest among his many sons. O son of Kuru! Kansa had mastered the art of all weapons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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