Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.22.d37-d39h: राजेन्द्र! कृत्तिवास और त्र्यम्बक नाम से प्रसिद्ध महाप्रतापी जरासंध, संसार के राजाओं को बलि देकर परम भगवान महादेवजी की आराधना करना चाहता था और इसी अभीष्ट की पूर्ति के लिए उसने जीते हुए समस्त राजाओं को बन्दी बना लिया था। भरतश्रेष्ठ! यह सब वृत्तांत आपसे यथावत् कहा गया। अब वह वृत्तांत सुनिए, जिसमें भीमसेन ने राजा जरासंध को मारा था। | mahabharat अध्याय 2.22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजेन्द्र! कृत्तिवास और त्र्यम्बक नाम से प्रसिद्ध महाप्रतापी जरासंध, संसार के राजाओं को बलि देकर परम भगवान महादेवजी की आराधना करना चाहता था और इसी अभीष्ट की पूर्ति के लिए उसने जीते हुए समस्त राजाओं को बन्दी बना लिया था। भरतश्रेष्ठ! यह सब वृत्तांत आपसे यथावत् कहा गया। अब वह वृत्तांत सुनिए, जिसमें भीमसेन ने राजा जरासंध को मारा था।
Rajendra! The prosperous Jarasandha, known by the names Krittivasa and Trimbak, wanted to worship the supreme god Mahadevji by sacrificing the kings of the world and to achieve this desired purpose, he had imprisoned all the kings he had conquered. Bharatshrestha! All this story was told to you exactly. Now listen to the incident of how Bhimasena killed King Jarasandha.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि जरासंधवधपर्वणि जरासंधयुद्धोद्योगे द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत जरासंधवधपर्वमें जरासंधका युद्धके लिये उद्योगविषयक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३९ श्लोक मिलाकर कुल ७५ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥