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mahabharat 2.22.d3: वैशम्पायनजी बोले - राजन्! यदुकुल में परम बुद्धिमान वसुदेव उत्पन्न हुए, जो वृष्णिवंश के राजकुमार और राजा उग्रसेन के विश्वासपात्र मंत्री थे।   |   mahabharat अध्याय 2.22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.22.d3 
वैशम्पायन उवाच
यादवानामन्ववाये वसुदेवो महामति:।
उदपद्यत वार्ष्णेयो ह्युग्रसेनस्य मन्त्रभृत्॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन्! यदुकुल में परम बुद्धिमान वसुदेव उत्पन्न हुए, जो वृष्णिवंश के राजकुमार और राजा उग्रसेन के विश्वासपात्र मंत्री थे।
 
Vaishampayanji said – King! In Yadu clan, the most intelligent Vasudev was born, who was the prince of Vrishni dynasty and a trusted minister of King Ugrasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)