श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक d28
 
 
श्लोक  2.22.d28 
एवं तं वञ्चयित्वा च राजानं स महामति:।
वासुदेवं महात्मानं वर्धयामास गोकुले॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार परम बुद्धिमान वासुदेव ने राजा कंस को धोखा देकर उसके महान पुत्र वासुदेव को गोकुल में ला दिया।
 
The most intelligent Vasudeva thus tricked King Kansa and got his great son Vasudeva brought up in Gokul.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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