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mahabharat 2.22.d20-d21: तत्पश्चात्, सातवें गर्भ के रूप में बलदेव ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया। महाराज! यमराज ने अपनी माया से उस अद्वितीय गर्भस्थ शिशु को देवकी के गर्भ से निकालकर रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया। अपने आकर्षक स्वरूप के कारण उस बालक का नाम संकर्षण रखा गया। अपने बल के कारण उसका नाम बलदेव रखा गया।   |   mahabharat अध्याय 2.22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.22.d20-d21 
अथ तस्यां समभवद् बलदेवस्तु सप्तम:।
याम्यया मायया तं तु यमो राजा विशाम्पते॥
देवक्या गर्भमतुलं रोहिण्या जठरेऽक्षिपत्।
आकृष्य कर्षणात् सम्यक् संकर्षण इति स्मृत:॥
बलश्रेष्ठतया तस्य बलदेव इति स्मृत:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, सातवें गर्भ के रूप में बलदेव ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया। महाराज! यमराज ने अपनी माया से उस अद्वितीय गर्भस्थ शिशु को देवकी के गर्भ से निकालकर रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया। अपने आकर्षक स्वरूप के कारण उस बालक का नाम संकर्षण रखा गया। अपने बल के कारण उसका नाम बलदेव रखा गया।
 
Thereafter, Baldev was born in Devaki's womb as the seventh foetus. King! Yamraj, with the help of Yama's Maya, took out that unique foetus from Devaki's womb and placed it in Rohini's womb. Due to his attractiveness, that child was named Sankarshan. Due to his strength, he was named Baldev.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)