श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  2.22.d15 
अहिंस्यां प्रमदामाहु: सर्वधर्मेषु पार्थिव।
अकस्मादबलां नारीं हन्तासीमामनागसीम्॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! लगभग सभी धर्मों में स्त्रियों को अपरिग्रही बताया गया है। क्या आप अचानक इस अबला और निर्दोष स्त्री को मार डालेंगे?
 
‘Lord of the Earth! In almost all religions, women have been declared inviolable. Will you suddenly kill this weak and innocent woman?’
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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