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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  2.22.d11 
ततोऽन्तरिक्षे वागासीद् देवदूतस्य कस्यचित्।
वसुदेवश्च शुश्राव तां वाचं पार्थिवश्च स:॥
 
 
अनुवाद
तभी आकाश में किसी देवदूत की आवाज स्पष्ट सुनाई दी। वसुदेवजी ने उसे सुना और राजा कंस ने भी।
 
At this time, the voice of an angel was clearly heard in the sky. Vasudevji heard it and so did King Kansa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)