श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  2.22.d1 
(जनमेजय उवाच
किमर्थं वैरिणावास्तामुभौ तौ कृष्णमागधौ।
कथं च निर्जित: संख्ये जरासंधेन माधव:॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - मुने! भगवान श्रीकृष्ण और मगधराज जरासंध एक-दूसरे के शत्रु क्यों हो गए? और जरासंध ने यदुकुलतिलक श्रीकृष्ण को युद्ध में कैसे पराजित किया?
 
Janmejay asked – Mune! Why did Lord Krishna and Magadha king Jarasandha become enemies of each other? And how did Jarasandha defeat Yadukulatilaka Shri Krishna in the war?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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