vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन
»
श्लोक 8
श्लोक
2.22.8
त्वया चोपहृता राजन् क्षत्रिया लोकवासिन:।
तदाग: क्रूरमुत्पाद्य मन्यसे किमनागसम्॥ ८॥
अनुवाद
राजन! आपने पृथ्वी पर रहने वाले क्षत्रियों को बंदी बना लिया है। ऐसा क्रूर अपराध करने के बाद भी आप अपने को निर्दोष कैसे मान सकते हैं?॥8॥
King! You have imprisoned the Kshatriyas residing on Earth. How can you consider yourself innocent even after organizing such a brutal crime?॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×