श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.22.8 
त्वया चोपहृता राजन् क्षत्रिया लोकवासिन:।
तदाग: क्रूरमुत्पाद्य मन्यसे किमनागसम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजन! आपने पृथ्वी पर रहने वाले क्षत्रियों को बंदी बना लिया है। ऐसा क्रूर अपराध करने के बाद भी आप अपने को निर्दोष कैसे मान सकते हैं?॥8॥
 
King! You have imprisoned the Kshatriyas residing on Earth. How can you consider yourself innocent even after organizing such a brutal crime?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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