श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.22.7 
श्रीकृष्ण उवाच
कुलकार्यं महाबाहो कश्चिदेक: कुलोद्वह:।
वहते यस्तन्नियोगाद् वयमभ्युद्यतास्त्वयि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - हे महारथी! सम्पूर्ण कुल में एक ही व्यक्ति कुल का दायित्व संभालता है। वह कुल के सभी सदस्यों की रक्षा करता है। ऐसे महापुरुष की अनुमति से ही हम आज तुम्हें दण्ड देने के लिए तैयार हैं।
 
Shri Krishna said - O great warrior! In the entire clan, only one person takes care of the responsibility of the clan. He protects all the members of the clan. It is with the permission of such a great man that we are ready to punish you today.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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