श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.22.32 
स तु सेनापतिं राजा सस्मार भरतर्षभ।
कौशिकं चित्रसेनं च तस्मिन् युद्ध उपस्थिते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् जब मगधनरेश उस युद्ध में उपस्थित हुए, तब उन्होंने अपने सेनापति कौशिक और चित्रसेन (जो उस समय जीवित नहीं थे) का स्मरण किया॥32॥
 
Bharatshrestha! Thereafter, when Magadhanresh was present in that war, he remembered his commanders Kaushik and Chitrasen (who were not alive at that time). 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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