Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.22.31: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! ऐसा कहकर राजा जरासन्ध ने उन तीनों घोर कर्म करने वाले वीरों से युद्ध करने की इच्छा से अपने पुत्र सहदेव का राज्याभिषेक करने की आज्ञा दी। | mahabharat अध्याय 2.22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा जरासंध: सहदेवाभिषेचनम्।
आज्ञापयत् तदा राजा युयुत्सुर्भीमकर्मभि:॥ ३१॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! ऐसा कहकर राजा जरासन्ध ने उन तीनों घोर कर्म करने वाले वीरों से युद्ध करने की इच्छा से अपने पुत्र सहदेव का राज्याभिषेक करने की आज्ञा दी।
Vaishmpayana says: Janamejaya! Having said this, King Jarasandha, desiring a battle with those three heroes who had committed terrible deeds, ordered the coronation of his son Sahadeva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥