श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.22.23 
जहि त्वं सदृशेष्वेव मानं दर्पं च मागध।
मा गम: ससुतामात्य: सबलश्च यमक्षयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मगधराज! आप जैसे वीरों के सामने अभिमान और अहंकार त्याग दीजिए। इस अभिमान को मत रखिए और अपने पुत्र, मन्त्रियों और सेना सहित यमलोक जाने की तैयारी कीजिए॥ 23॥
 
O King of Magadh! Stop being proud and arrogant in front of brave people like you. Do not keep this pride and prepare to go to Yamaloka with your son, ministers and army.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd