श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.22.19 
एष ह्यैन्द्रो वैजयन्तो गुणैर्नित्यं समाहित:।
येनासुरान् पराजित्य जगत् पाति शतक्रतु:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में मारे गए इस क्षत्रिय का इन्द्र का वैजयंत नामक महल (राजमहल) है। यह सदैव सर्वगुण संपन्न रहता है। इसी युद्ध के द्वारा शतक्रतु इन्द्र दैत्यों को परास्त करके सम्पूर्ण जगत की रक्षा करते हैं। 19॥
 
This Kshatriya, who died in battle, has a palace (royal palace) called Indra's Vaijayant. It is always full of all qualities. Through this war, Shatkratu Indra defeats the demons and protects the entire world. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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