श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.22.18 
स्वर्गयोनिर्महद् ब्रह्म स्वर्गयोनिर्महद् यश:।
स्वर्गयोनिस्तपो युद्धे मृत्यु: सोऽव्यभिचारवान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वेदों का अध्ययन स्वर्ग प्राप्ति का कारण है, दान रूपी महान यश भी स्वर्ग प्राप्ति का कारण है, तप भी स्वर्ग प्राप्ति का साधन कहा गया है; परंतु क्षत्रिय के लिए इन तीनों की अपेक्षा युद्ध में मृत्यु को चुनना ही स्वर्ग प्राप्ति का निश्चित मार्ग है ॥18॥
 
Study of the Vedas is the reason for attaining heaven, great fame in the form of charity is also the reason for heaven, penance has also been said to be a means to heaven; But for a Kshatriya, choosing death in battle over these three is the surest way to attain heaven. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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